स्वतंत्र आर्थिक विनियामक, ऐरा, का लक्ष्य हवाईअड्डा सुविधाओं में निवेश को प्रोत्साहित करने और वैमानिक सेवाओं के लिए टैरिफ को विनियमित करने के लिए सभी प्रमुख हवाईअड्डों के बीच लाभप्रद प्रतिस्पर्धा को बढावा देना और सभी को समान अवसर प्रदान करना है।
भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 के अध्याय III (धारा13) के अनुसार प्राधिकरण के सांविधिक कृत्य निम्नानुसार हैं:-
प्राधिकरण के कृत्य :–
(1) प्राधिकरण महाविमानपत्तनों के संबंध में निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात:-
(क) निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए वैमानिक सेवाओं के लिए टैरिफ अवधारित करना-
(i) विमानपत्तन सुविधाओं के सुधार के लिए उपगत पूंजी व्यय और समय से किया गया विनिधान;
(ii) प्रदान की गई सेवा, उसकी क्वालिटी और अन्य सुसंगत बातें;
(iii) दक्षता में सुधार लाने के लिए लागत;
(iv) महाविमानपत्तन का मित्तव्ययी और व्यवहार्य प्रचालन;
(v) वैमानिक सेवाओं से भिन्न सेवाओं से प्राप्त राजस्व;
(vi) किसी करार या समझौता ज्ञापन में या अन्यथा केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रस्थापित रियायत;
(vii) कोई अन्य बात जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सुसंगत हो:
परंतु उपखंड (i) से उपखंड (vii) में विनिर्दिष्ट उपरोक्त सभी या किसी बात को ध्यान में रखते हुए, भिन्न-भिन्न विमानपत्तनों के लिए भिन्न- भिन्न टैरिफ संरचनाएं नियत की जा सकेंगी;
(ख) महाविमानपत्तनों के संबंध में विकास फीस की रकम अवधारित करना;
(ग) वायुयान अधिनियम, 1934 (1934 का 22) के अधीन बनाए गए वायुयान नियम, 1937 के नियम 88 के अधीन उद्गृहीत यात्री सेवा फीस की रकम अवधारित करना;
(घ) सेवा की क्वालिटी, निरंतरता और विश्वसनीयता से संबंधित ऐसे उपवर्णित कार्यपालन मानकों को जो केन्द्रीय सरकार या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं,
मॉनीटर करना;
(ङ) ऐसी सूचना मांगना जो खंड (क) के अधीन टैरिफ के अवधारण के लिए आवश्यक हो;
(च) टैरिफ से संबंधित ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जो उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा सौंपे जाएं या इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हों;
(2) प्राधिकरण, पांच (5) वर्ष में एक बार टैरिफ का अवधारण करेगा और यदि ऐसा करना समुचित और लोकहित में समझा जाए और इस प्रकार अवधारित टैरिफ का उक्त पांच वर्ष की अवधि के दौरान समय-
समय पर संशोधन कर सकेगा।
(3) प्राधिकरण, उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करते समय भारत की प्रभुता और अखंडता के हित राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोकव्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता के विरूद्ध
कार्य नहीं करेगा।
(4) प्राधिकरण, अन्य बातों के साथ-साथ अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कृत्यों का निर्वहन करते समय-
(क) विमानपत्तन के सभी पणधारियों से सम्यक परामर्श करके;
(ख) सभी पणधरियों को अपने निवेदन प्राधिकरण को करने के लिए अनुज्ञात करके;
(ग) प्राधिकरण के सभी विनिश्चयों का पूर्ण रूप से दस्तावेजीकरण और स्पष्ट करके, पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
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